अनुभव की बात,अनुभव के साथ

सरकार की व्यवस्था से पानी-पानी हैं बिहारवासी।

शर्म आती है शर्म,ऐसी सरकार पर और ऐसी व्यवस्था पर।विपक्ष में रहकर तात्कालिक सरकार पर गरजने वाले राजनेता आज मौन हैं,क्योंकि आज वो सत्ता में हैं।महज चार दिन की बारिश ने सरकार को उनकी औकात दिखा दी।पूरा प्रदेश ही नहीं, राजधानी पटना भी पानी-पानी है।समस्त बिहार वासी सरकार की इस व्यवस्था से पानी-पानी हैं।स्मार्ट पटना बनाने चले इन नेताओं को क्या यह नहीं सूझ रहा कि आज राजधानी पटना के अस्सी फ़ीसदी इलाके जलमग्न हैं।आम जनता की तो बात ही मत कीजिए,मंत्रियों और विधायकों का अपने-अपने घरों से निकलना मुश्किल है।सड़कों पर पांच से छह फीट तक पानी जमा है और सड़कों पर नाव चल रही है।स्कूल,कॉलेज, अस्पताल सब ठप हैं।मरीज बेहाल हैं, मर रहे हैं।हॉस्टलों में रहने वाले बच्चे दो दिन से भूखे प्यासे हैं और हमारे सुशासन बाबू चैन की बंसी बजा रहे हैं।प्रदेश के वर्तमान उपमुख्यमंत्री,पूर्व में नगर विकास मंत्री रह चुके हैं।उन्हें पता होना चाहिए कि सफाई के नाम पर हर वर्ष करोड़ों की लूट हो रही है तो कहां और इसके लिए कौन दोषी है।हर बात के लिए पिछली सरकारों को दोष देने वाले सत्ता पक्ष के प्रवक्ताओं की बोलती बंद है,जवाब नहीं सूझ रहा है,आखिर उनका घर भी जो डूब रहा है।आम लोगों तक उनकी जरूरत का सामान नहीं पहुंच पा रहा।दुकानों में पानी भर चुका है और दुकानों को करोड़ों का नुकसान हो गया है।टेलीफोन सेवा बाधित है, बिजली बाधित है,ट्रेनें बाधित हैं।कहा जा सकता है कि पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त है।कितनों की मौत हो चुकी है,तो कितने ही मरीजों के दम टूटने की संभावना है।अस्पतालों में भी पानी जो भरा है।

जिन नालों की सफाई के नाम पर करोड़ों खर्च हुए वो ओवरफ्लो हो रहे हैं।हर वर्ष नाला उड़ाही के नाम पर खानापूर्ति हो जाती है।60 साल पुराने सीवरेज सिस्टम करीब-करीब ध्वस्त हो चुके हैं।संम्प हाउस में लगे मोटर हाँफ रहे हैं।कहीं संम्प हाउस का स्टोरेज टैब छोटा पड़ रहा है तो कहीं मोटर खराब है।कहीं मोटर की क्षमता कम है तो कहीं बिजली नहीं रहने से मोटर नहीं चल पा रहा,तो कहीं मोटर चलाने के लिए डीजल ही उपलब्ध नहीं है।कहना गलत न होगा कि पूरे प्रदेश में यदि किसी शहर की हालत सबसे अधिक खराब है तो वो है राजधानी पटना।सत्ता में बैठे नेता जितना हमला विपक्ष पर किया करते हैं,काश उतनी ही शिद्दत से इस शहर की व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देते तो आज ये नौबत ही नहीं आती।शर्मिंदा है,प्रदेश का हर नागरिक शर्मिंदा है।सुशासन बाबू की इस व्यवस्था से पूरा प्रदेश पानी-पानी है।

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