अस्ताचलगामी छठ महापर्व का पहला अर्घ्य शनिवार को

खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास छठ व्रत प्रारम्भ

उग हे सुरूजदेवा,भईल भिनुसार…

कैमरा मैन राहुल कुमार के साथ बद्री गुप्ता लातेहार ब्यूरो की रिपोर्ट

लातेहार जिला के चंदवा, बालूमाथ हेरहंज, बरवाडीह, महुआडांड़, गारु, मनिका प्रखंडों में धूमधाम से छठ पूजा की धूम मची है लोग आस्था का पर्व को लेकर छठ घाटों में बिजली की व्यवस्था सामाजिक तौर पर किया जा रहा है वह है सामाजिक संस्थानों के द्वारा छठ व्रतियों के लिए प्रसाद का वितरण किया जा रहा है साथ ही रोड की सफाई में सामाजिक कार्यकर्ता पुलिस प्रशासन के द्वारा जोर शोर से किया जा रहा है वही लोक आस्था का महापर्व नहाय-खाय के साथ शुरू हो गई। हिन्दू रीति रिवाज में किसी भी पूजा पाट और शुभ मुहूर्त से पहले स्नान सबसे जरूरी होता है। नहा-धोकर, नए वस्त्र पहनकर पवित्र होकर पूजा-पाठ की तैयारियां की जाती हैं। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाए जाने वाले चार दिनों तक चलने वाले छ्ठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, यानी पहले दिन सबसे पहले स्नान कर शुद्ध होना अहम माना जाता है। इस दिन सुबह-सुबह नहा धोकर सबसे पहले खुद को पवित्र किया जाता है। मतलब कि छठ पूजा हिंदुओं के लिये नेम, निष्ठा और पवित्रता का महान त्योहार माना जाता है।रविवार को छठ व्रती स्नान कर पूरे विधि विधान के साथ पूजा कर सूर्य भगवान के आराधना के साथ चावल दाल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में ग्रहण करती है। व्रतियों के साथ घर के सदस्य भी प्रसाद के रूप में ग्रहण करते है। व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण के पश्चात अपने पति से आशीर्वाद लेते है। वही शुक्रवार (लोहंडा) खरना उपवास कर संध्या में गन्ने के रस से बना चावल खीर के साथ दूध,चावल का पिट्ठा घी चुपड़ी रोटी भगवान सूर्य को अर्पित करने के बाद प्रसाद ग्रहण करती है। पश्चात 36 घंटे का निर्जला उपवास होता है।मंगलवार की संध्या भगवान भुवन भास्कर को पहला सायंकालीन अर्घ्य और बुधवार की अहले सुबह अर्घ्य दिया जाएगा। छठ महापर्व को लेकर नदी, तालाब और जलाशयों समेत साफ-सफाई की गई है।

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