आइसोलेशन में मरीज के लिए कुल 90 बेड तैयार.

 

nirmal kumar Pandey

कोरोना जैसी महामारी बीमारी से बचाव के लिये बिरौल सीएचसी भगवान भरोसे चल रही है।इसका मुख्य वजह है चिकित्सक, कर्मी और संसाधन की घोर कमी।कोरोना मरीज तो दुर छोटे छोटे बीमारी वाले मरीज को संसाधन के अभाव में डीएमसीएच रेफर कर दी जा रही है।एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में कोरोना मरीज के लिए बनाए गए आइसोलेशन में मरीज के लिए कुल 90 बेड तैयार है।रोस्टर के मुताबिक तीन चिकित्सक है लेकिन धरताल पर एक चिकित्सक पर छोड़ दी गई है।वैसे स्थिति में कोरोना जैसे बीमारी के लक्ष्ण देखने पर डीएमसीएच रेफर कर दी जा रही है। सरकारी अनुपात में चिकित्सक, एएनएम और संसाधनों का आभाव है।

6 प्रखंड का बिरौल अनुमंडल जनसंख्या के दृष्टि कोन से जिला का सबसे बड़े अनुमंडल के तौर पर जाने जाते है लेकिन बिरौल को अनुमंडल अस्पताल का दर्जा कागज पर प्रस्तावित होकर रह गयी है।इसका स्थानीय ठोस पहल नहीं की जा रही है।इन लोगों का ईलाज भगवान भरोसे है। अस्पताल में मात्र दस इंफ्रारेड थर्मामीटर और उपलब्ध है एक दर्जन से अधिक पीपीई कीट-लाखों की आवादी वाले बिरौल अनुमंडल वासियों के लिए कोरोना जैसे बीमारी के ईलाज के लिए संसाधनों की उपलब्धता देखकर पता लग रहा है कि ऐसे में इन मरीज को एक भगवान ही मालिक है। ऑक्सीजन सिलेंडर 10 है। एक चिकित्सक के भरोषे आइसोलेशन वार्ड के मरीज-बिरौल पीएचसी के समीप एएनएम ट्रेनिंग सेंटर में आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है।देख भाल के लिये तीन चिकित्सक की प्रतिनियुक्त है लेकिन एक ही चिकित्सक धरताल पर कार्य कर रहे है।थोड़े से लक्षण होने पर इन मरीज को डीएमसीएच रेफर कर दी जाती है।सेंपल लेने के लिये एक मात्र लैब टेक्नीशियन है।प्रभारी पीएचसी के डॉ फुल कांत झा के कंधे पर पुरी जिम्मेवारी है। 15 के जगह मात्र 8 चिकित्सक तैनात-सीएचसी में कुल 15 चिकित्सक की तैनाती होनी चाहिए लेकिन 8 चिकित्सक है इसमें 4 एमबीबीएस और 4 आयुष चिकित्सक तैनात है।इनकी जिम्मेवारी अलग अलग जगहों पर है।2 चिकित्सक शहरी अस्पताल के दर्जा प्राप्त प्रखंड मुख्यालय में डियुटी में तैनात है।एक को पोखराम गांव अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र की जिम्मेवारी मिली है।15 एएनएम के जगह 10 एएनएम है। चार एएनएम को भवानीपुर और देकुली जगरनाथ पुर प्रशव केंद्र पर तैनात की गई है।शेष की जिम्मेवारी सीएचसी और शहरी सेंटर पर है। जांच में पहुंचते है मरीज नहीं होते है कोरोना की जांच-कोरोना को लेकर गांव वाले एक्टिव है। दुसरे प्रदेश से आये लोगों को गांव वाले सबसे पहले उसे जांच के लिए सीएचसी भेजते है, चिकित्सक जांच करने से कतराते रहते है,लोगों के जिद के आगे उन्हें प्राथमिक उपचार किया जाता है उसके बाद उसे डीएमसीएच भेजा जाता है। चिकित्सक की माने तो जिस स्थिति में यह बीमारी फैल रही है उस आधार पर संसाधन की उपलब्धता नगण्य है। मरीजों की रक्षा के लिये सरकार स्तर से गांव गांव में कोरोना को लेकर प्रचार प्रसार जारी है।इस बीमारी को भगाना है तो सबसे पहले लोग मास्क और दुरी बनाकर बात चित करे।वैसे स्वास्थ्य प्रशासन इस बिमारी से निपटने के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बिरौल डॉ फुल कांत झा पुरी तरह से मुस्तैद है।

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