आयुक्त महोदय ने संभावित लू लहर को लेकर तैयारी की समीक्षा जिसमें सिवल सर्जन और अधिकारियों को निर्देश


रिपोर्ट गया
गया आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया असंगबा चूबा आओ की अध्यक्षता में संभावित आगामी लू लहर,पेयजल संकट, जलवायु परिवर्तन एवं सात निश्चय योजना की समीक्षा की गई है। जिलाधिकारी अभिषेक सिंह द्वारा पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से वर्ष 2019 के हिट वेब स्ट्रॉक की संक्षिप्त जानकारी दी गई है। उन्होंने बताया कि हिट वेब का प्रभाव खासकर गया शहर,मानपुर एवं वजीरगंज में रहा और यह उन्हीं क्षेत्रों में पाया गया जहां पहाड़ है लेकिन हरियाली नहीं है तथा भूगर्भ जल एवं धरातलीय जल की भी कमी है। उन्होंने कहा कि 15 जून 2019 को अचानक तापमान में वृद्धि हुई और 3 दिनों के अंदर 5 से 6 डिग्री तापमान एकाएक बढ़ गया था। उन्होंने कहा कि इस तरह के तापमान में परिवर्तन अन्य जगहों पर भी देखा गया है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में भी पाया गया लेकिन गया,औरंगाबाद और नवादा के कुछ क्षेत्र में इसका प्रभाव खास करके 60 वर्ष के ऊपर के व्यक्ति एवं 7 से 8 वर्ष के बच्चों पर पड़ा है। प्रभावित मरीजों के शरीर पर बर्फ़ रखने पर पिघल जाता था। 17 जून 2019 के बाद यह सामान्य हो गया है। इस दौरान लगभग 212 लोग अस्पताल में भर्ती हुए जिनमें से 49 लोगों की जान गई है। इनमें से 48 लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है। आयुक्त ने सिविल सर्जन गया को इसके बचाव के लिए पूर्व उपाय अपनाने के लिए खास करके प्रभावित क्षेत्र के लोगों के बीच जागरूकता करने के निर्देश दिए गए हैं। सिविल सर्जन ने कहा कि इस दौरान लोगों को पानी लगातार पीते रहना चाहिए और जैसे ही कोई व्यक्ति इसके चपेट में आता है तो तत्काल पानी चढ़ाना शुरू कर देना चाहिए और आयुक्त ने अप्रैल तक प्रचार प्रसार करवा देने का निर्देश दिया गया है।पेयजल की समीक्षा के दौरान पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता ने कहा कि जिले का भूजल स्तर औसतन 25 फीट पर है। आयुक्त ने कहा कि वैसे जगहों को चिन्हित करें जहां भूजल स्तर कम है।उन्होंने पीएचईडी के कनीय अभियंता को प्रखंड विकास पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर काम करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि जहां लोग रह रहे हैं वहां निश्चित रूप से पानी का स्रोत होगा। उस स्थल पर चापाकल अवश्य लगवाएंऔर इस बैठक में बताया गया कि कुल 79 क्षेत्र ऐसे हैं जहां पेयजल की समस्या है तथा वहां भूजल स्तर काफी नीचे है। पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता ने कहा कि अहमदाबाद से चार मशीन आया है। संवेदक के माध्यम से काम कराया जा रहा है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी को संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी और पीएचइडी से समन्वय स्थापित कर 15 दिनों के अंदर उन 79 स्थलों पर चापाकल लगवाने का निर्देश दिया गया है। आयुक्त ने कार्यपालक अभियंता पीएचईडी को पहले से ही टैंकर की व्यवस्था एवं नजदीक के जल स्रोत की व्यवस्था कर लेने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने संपूर्ण जिले के लिए कार्य योजना बना लेने का निर्देश दिया साथ ही कहीं से भी पानी की मांग की जाती है तो कम से कम समय में वहां पानी उपलब्ध कराने की योजना बना लेने का निर्देश दिया गया है।जिलाधिकारी ने कहा कि यह अच्छी बात है कि इस बार फरवरी माह में भूजल स्तर 26 फीट पर है जबकि पिछले वर्ष फरवरी माह में 40 फीट पर था। जिलाधिकारी ने कहा कि वर्ष 2000 से 2019 तक लगभग 8 बार सुखाड़ आ चुका है। जिसमें 2004, 2009, 2010, 2013 एवं 2018 में सरकार द्वारा सुखाड़ घोषित किया गया जबकि 1952 से 2000 के बीच मात्र 8 बार सुखाड़ आया था। इसके साथ ही विगत 16 वर्षों में वर्षा में लगभग 17 से 20% गिरावट आई है।
जल- जीवन-हरियाली की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 37120 जल स्रोत जिले में है एवं 5507 तालाब हैं। निजी कुआं की संख्या 27093 एवं सार्वजनिक स्थलों पर कुआं की संख्या 3409 है। वजीरगंज प्रखंड में सार्वजनिक कुआं 121, निजी कुआं 930 है एवं 87 तालाब है। आयुक्त ने जनसंख्या के अनुपात में वजीरगंज प्रखंड में कुआं और तालाब की संख्या पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि लगभग सवा दो लाख 2.25 लाख की जनसंख्या पर मात्र 1051 कुआं और 87 तालाब बहुत कम है। जबकि पूर्व में पेयजल का मुख्य स्रोत कुआं और तालाब ही थे। उन्होंने अंचलाधिकारी और मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी को अच्छी तरह सर्वे कराने का निर्देश दिए गए हैं। लघु जल संसाधन विभाग के समीक्षा के दौरान बताया गया कि 1 एकड़ से अधिक 1796 एवं 1 एकड़ से कम 2626 जल स्रोत हैं।ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 880 जल स्रोतों का जीर्णोद्धार कराया गया है जबकि 4610 आहर में से 1071 आहर में कार्य प्रारंभ किया गया है तथा 3325 पइन में से 548 पइन का जीर्णोद्धार कराया गया है।वर्ष 2020-21 के दौरान वजीरगंज में चार चेक डैम बनाया जाएगा। आयुक्त ने नवादा के फुलवरिया चेक डैम की तरह वजीरगंज में प्राकृतिक जलाशय बनाने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने कहा कि फुलवरिया डैम के द्वारा 9000 घरों में जलापूर्ति की जा रही है। इसी तर्ज पर वजीरगंज में किसी स्थान पर प्राकृतिक जलाशय का निर्माण कराया जा सकता है।
आज नल जल योजना की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 2603 वार्ड में से 1769 वार्ड में कार्य पूर्ण हो गया है। उसी प्रकार नली गली योजना में वजीरगंज के 270 वार्ड में से 221 वार्ड में कार्य पूर्ण हो चुका है, जिले में 4573 वार्ड में कार्य किए गए हैं
जिला कृषि पदाधिकारी को संभावित सुखाड़ के मद्देनजर वैकल्पिक फसल की कार्य योजना तैयार कर लेने का निर्देश दिया गया है।जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि जिले में 24 स्थानों पर कैटल टब बन गया है तथा 100 स्थलों पर अतिरिक्त कैटल टब निर्माण कराया जा रहा है।आयुक्त ने पशुपालकों के बीच जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।सिविल सर्जन गया को सभी स्वास्थ्य उपकेंद्र तथा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सक्रिय रखने का निर्देश दिया गया है। इस बैठक के बाद जीरगंज प्रखंड कार्यालय परिसर में आयुक्त महोदय, जिलाधिकारी, उप विकास आयुक्त एवं सहायक समाहर्ता द्वारा पौधारोपण किया गया है।आयुक्त ने जिलाधिकारी के साथ सिंघोरा ग्राम अवस्थित 2 करोड़ 27 लाख रुपए की लागत से 24 एकड़ में बनने वाले जलाशय का निरीक्षण किया गया है। इस अवसर पर लघु जल संसाधन के सहायक अभियंता ने बताया कि इस जलाशय में बरसात के दिनों में 6 लाख एमक्यू यानी 6 लाख x 1000 लीटर पानी तथा बरसात के बाद 2.5 लाख एमक्यू पानी सुरक्षित रहेगा। जिससे इस क्षेत्र का भूगर्भ जल स्तर बना रहेगा तथा सिंघोरा तथा गुड़ियावां के 400 हेक्टेयर क्षेत्र में पटवन किया जा सकेगा एवं आयुक्त द्वारा पुनावा तालाब का भी अवलोकन किया गया है। जिलाधिकारी द्वारा बताया गया कि इस तालाब को और गहरा किया गया है तथा गर्मी के दिनों में भी इसमें पानी रहेगा। आयुक्त ने वाटर ट्रीटमेंट कराकर आसपास के क्षेत्रों में पानी उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है। इस अवसर पर सहायक समाहर्ता केएम अशोक, उप विकास आयुक्त किशोरी चौधरी,आयुक्त के सचिव अफजलूर रहमान, उप निदेशक जनसंपर्क नागेंद्र कुमार गुप्ता,सिविल सर्जन वीके सिंह सहित तमाम पदाधिकारी उपस्थित थे।

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