छपरा शहर का एक मात्र शिशु पार्क,जो वर्षो से प्रशासनिक उदासीनता का शिकार बना पड़ा है।

छपरा स्थित शिशु पार्क जो नाम के लिए पार्क है यहां न तो किसी तरह की सुरक्षा है ना ही कोई समुचित व्यवस्था,लोग तो पार्क के नाम पर बच्चो को यहां लेकर यहां मन बहलाने आते है लेकिन यहां सुरक्षित महसूस नही करते क्योंकि यहां खलने के लायक बच्चो के लिए कुछ भी नही है अगर कुछ संसाधन है भी तो वो आने जर्जर स्थिति में है लोहे पुराने होने के चलते उसमे जंग लग चुका है छोटे छोटे बच्चो को अगर सावधानी पूर्वक नही रखा गया तो बच्चे इससे घायल भी हो सकते है।वही इस पार्क में घूम रहे लोगो की माने तो दशकों पहले इसका उद्घाटन हुआ लेकिन उस समय से ही कई बार इसके लिए कई योजनांए बनी राशियां भी आवंटित हुई लेकिन अबतक समुचित रूप से इस पार्क का निर्माण नही हो सका।लोगो की माने तो यहां सुरक्षा की भी कोई व्यवस्था नही है असामाजिक तत्वों का यहा आना जाना लगा रहता है,जिससे लोगो मे डर भी बना रहता है।यहां लाइट भी लगा है लेकिन वो भी किसी काम का नही है,कचड़े जगह जगह देखनो को मिल जाएंगेप्रशासन से कई बार यहां के लोगो द्वारा शिकायत भी की जाती है लेकिन अबतक आश्वाशन के सिवा कुछ नही मिला,जिस कारण शहर का ये एक मात्र पार्क नाम का बनकर रह गया है।बाईट बच्चेसुरेश कुमार सिंह,खेल शिक्षकमोहम्मद अली,छपरा

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