झुलसा रोग से खराब हो सकती है,आलू की फसलें

(अरवल)

खेत-खलिहान से…..तापमान गिरावट और लगातार मौसम में परिवर्तन से इस समय आलू की फसल में कई तरह के रोग लग जाते हैं,अगर समय रहते इनका प्रबंधन न किया गया तो आलू किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस बारे में जलपुरा ग्राम सुनील शर्मा एवं श्री कमला सिंह जी बताते हैं कि “अभी तो आलू की फसल में कोई रोग लगने की जानकारी कुछ ही जगह से आयी है।फखरपुर,रॊहाई,बारा ,बखतारी आदि कई इलाकों में देखा गया है।लेकिन आने वाले समय में रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है।लेकिन बादल होने पर आलू की फसल में फंगस का इंफेक्शन होने की संभावना बढ़ जाती है,जो झुलसा रोग का प्रमुख कारण होता है। जैसे ही बादल आए तुरंत दवाओं का छिड़काव करना चाहिए।”

अनुभवी एवं एक वृहद कृषक जिन्होंने लगभग समस्त कृषि उपकरण और संसाधन रखने वाले जो खुद 45 साल तक लगभग 50 बीघा भूमि पर कृषि कार्य किया है,वे राम गिरीश शर्मा एवं रणजीत कुमार,ब्रजेश जी ने बताया की”इस समय किसानों को चाहिए कि खेत में नमी बनाए रखें और शाम के समय अगर कहीं पर कोहरा दिखायी दे तो शाम के समय घास-फूस इकट्ठा करके आग चलाकर धुआ करना चाहिए।” *झुलसा रोग से नुकसान*इस समय भारत दुनिया में आलू के रकबे के आधार पर चौथे और उत्पादन के आधार पर पांचवें स्थान पर है। आलू की फसल को झुलसा रोगों से सब से ज्यादा नुकसान होता है।झुलसा रोग दो तरह के होते हैं, अगेती झुलसा और पछेती झुलसा। अगेती झुलसा दिसंबर महीने की शुरुआत में लगता है, जबकि पछेती झुलसा दिसंबर के अंत से जनवरी के शुरूआत में लग सकता है। इस समय आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग लग सकता है। *झुलसा रोग के लक्षण*अगेती झुलसा में पत्तियों की सतह पर छोटे-छोटे भूरे रंग के धब्बे बनते हैं, जिनमें बाद में चक्रदार रेखाएं दिखाई देती है। रोग के प्रभाव से आलू छोटे व कम बनते हैं।पछेती झुलसा आलू के लिए ज्यादा नुकसान दायक हैमौसम में बदलाव होने वाले रोग के कारण चार से छः दिन में फसल पूरी तरह नष्ट हो जाती है । बीमारी में पत्तो के उपर काले काले चकतो के रूप में नजर आते हैं, जो बाद में बढने लगती है।

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