तंगी के तरफ जा रहे हैं कपड़ा व्यवसाई आज कपड़ा व्यवसाई की आवाज सुनने वाला कोई नही है। बरुण कुमार:—

जहानाबाद कोरोना काल में सबसे ज्यादा मुसीबत का पहाड़ किसी पर टूटा है, तो वो हैं व्यापारी बंधु। शहर का हर कपड़ा व्यापारियों के पास अपना खुद का पूंजी नहीं है, सिर्फ और सिर्फ 10 प्रतिशत कपड़ा व्यापारीयों के पास ही खुद की पूंजी है, और अपनी खुद की दुकानें हैं। उसी दुकान से वह अपने परिवार का पेट भी पालता है। बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिलाता हैं, जो कर्ज लिया हैं उसे भी थोड़ी थोड़ी कर वसूल भी करता है। आप सोच सकते हैं कि इस पांच महीने के लॉक डाउन में हमारे भाइयों नें क्या क्या परेशानियां उठाई है। वो दर्द वही समझ सकता हैं, जो उस व्यापार से तालुकात रखता हैं। आज के हालात में कपड़ा व्यापारियों का आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। आज उनके हालात को ना बैंक सुन रही हैं, ना वह ब्याज वाले। यहां तक की मकान मालिक भी उसके दुख दर्द में शरीक नहीं हो रहें हैं।

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