पारंपरिक लोक गीतों पर झूमे लोक गायिका नीतू नवगीत ~ बरुण कुमार:—

स्पंदन ऑनलाइन म्यूजिक कंसर्ट

पारंपरिक लोक गीतों पर झूमे लोक गायिका नीतू नवगीत ने सुनाए बिहार के पारंपरिक गीत।

जमशेदपुर , 28 जून : विश्व संगीत सप्ताह के अवसर पर मारवाड़ी युवा मंच द्वारा आयोजित स्पंदन ऑनलाइन म्यूजिक कंसर्ट के तहत बिहार की प्रसिद्ध लोक गायिका नीतू कुमारी नवगीत ने माटी की महक कंसर्ट में पारंपरिक गीतों के माध्यम से ऐसी सोंधी खुशबू बिखेरी कि सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए और लगातार दो घंटे तक संगीत की सरिता में गोते लगाते रहे । नीतू नवगीत ने अपने कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना मंगल के दाता भगवान बिगड़ी बनाई जी से की । इसके बाद उन्होने झूमर और कजरी की पारंपरिक धुनों पर अनेक नए- पुराने गीत सुनाए और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । कोयल बिना बगिया ना शोभे राजा, पिपरा के पतवा फुनिगिया डोले रे ननदी वईसे डोले जियरा हमार रे छोटी ननदी, पटना से पाजेब बलम जी आरा से होठलाली मंगाई दा छपरा से चुनरिया छींट वाली, सेजिया पर लोटे काला नाग हो कचौड़ी गली सून कइला बलमू जैसे गीतों पर श्रोता खूब झूमे । उन्होंने राम जी और शिव जी के जीवन से जुड़े अनेक गीतों की प्रस्तुति करके भक्ति की गंगा भी बहाई । आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया चारो दूल्हा में बड़का कमाल सखिया, राम जी से पूछे जनकपुर की नारी बता द पहुना, लोगवा देत काहे गारी बता द पहुना, ए पहुना जी मिथिले में रहूँ ना, जे सुखवा है ससुरारी में उ सुखवा है कहूँ ना जैसे गीतों से माहौल राममय हुआ । शिवजी से जुड़े गीतों को भी श्रोताओं ने खूब पसंद किया । कार्यक्रम के दौरान लोक गायिका नीतू नवगीत ने कहा कि भोजपुरी, मैथिली, मगही, नगपुरिया और संथाली जैसी भाषाओं के लोकगीतों में बिहार और झारखंड की माटी की सोंधी महक समाई हुई है । ये गीत हमें हमारी समृद्ध विरासत से जोड़ते हैं । इन गीतों को सहेज कर रखना जरूरी है । कार्यक्रम के आयोजन में अमित खंडेलवाल, निलेश राजगढ़िया, विवेक पुरोहित, हेमंत अग्रवाल, प्रकाश शर्मा, आशुतोष काबरा, सोनू शर्मा, अमरनाथ जायसवाल आदि की प्रमुख भूमिका रही ।

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