बरवाडीह-मंडल मार्ग अपने जनप्रतिनिधियों का दंश की मार पिछले चार दशक से झलते हुये आज भी अपने पूर्णउद्धार की आशा में…….

(रवि कुमार गुप्ता की रिपोर्ट:-लातेहार)

लातेहार/बरवाडीह:- बरवाडीह प्रखंड का एक ऐसा कड़वा सत्य जिससे कोई भी जनप्रतिनिधि वाकिफ न हो ऐसा नही है,हर बार इसे की चुनाव का मुद्दा बना कर चाहें वो लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव जनता के बीच जाते है।जब चुनाव के परिणाम घोषित होते ही सारे वादे-अस्वाशन सिफर। जनता के हाथ मे फिर वही खाली कटोरा।हम बात कर रहे है,बरवाडीह-मंडल सड़क मार्ग की जो चुनाव जीतने की ब्रह्मास्त्र है, यहाँ की जनता क्षेत्र के विकास के लिये,लालची नेताओँ के लोकलुभावन बातों पर विश्वास कर लेते है।झारखंड की जनता स्वभाव से सरल एवं निष्कलंक होते है,जो सरलता के साथ इन छलिये नेताओ पर भरोषा कर लड़ते है।बताते चले कि बरवाडीह-मंडल सड़क मार्ग पिछले कई दशकों से जर्जर अवस्था मे है,

जो अपनी दुर्दशा का रोना…रो रहा है।बहुप्रतीक्षित मंडल डेम की लाइफ लाइन है,बरवाडीह-मंडल मार्ग जो तीन जिलों लातेहार, गढ़वा एवं पलामू को जोड़ता है तथा साथ ही साथ बरवाडीह भाया भंडरिया होते हुये छत्तीसगढ़ की रामानुजगंज को जोड़ता है,लेकिन सरकार की गलत नीतियों एवं जनप्रतिनिधियों के अदूरदर्शिता के कारण अधर में लटका हुआ है, इस मार्ग के दोनों तरफ अतिसुदुरवर्ती नक्सल प्रभावित क्षेत्र लगते है जैसे सैदुप,लात, ततहा,मोरवाई आदि।अगर कोई भी विकट परिस्थिति उत्पन होती है तो उन तक संसाधनों को पहुँचना काफी मुश्किल हो जाता है,चाहें स्वास्थ्य सुविधाएं हो या नक्सलियों से लिये स्थापित हमारे अर्द्धसैनिक बलों तक किसी भी विकट परिस्थिति में तात्कालिक सुविधाओं का पहुँचना कठिन हो जाता है।आखिर कौन है जिम्मेदार परिस्थितियों का…निश्चित ही सरकार एवं जनप्रतिनिधि।फिर हुआ है चुनाव मुद्दा भी मैं हूँ, और उपेक्षित भी मै हूँ, मैं बरवाडीह-मंडल सड़क मार्ग।स्वार्थी जनप्रतिनिधियों से कोई भी आश नहीं हैं,मुझे जनता तक कैसे संसाधन पहुँचाया,जाये इसी के आश में,आज भी तठष्य हूँ। ऊ

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