बिहार के चुनाव में मुख्य मुद्दा है कुर्सी.

दिग्विजय सिंह

 

दुनिया के सबसे बडे प्रजातांत्रिक देश में बिहार निर्वाचन 2020 में सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है- एन केन प्रकारेण कुर्सी पर काबिज होना|बिहार में सत्ता का स्वाद कांग्रेस, राजद, भाजपा, जदयू समेत सभी पार्टियाँ चख चुकी है|वर्तमान समय में सभी पार्टियाँ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन तथा महागठबंधन में विभक्त होकर इसी के बैनर तले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं|चुनाव जीतने के लिए ये सभी पार्टियाँ हिन्दू मुस्लिम राष्ट्र तोड़ने की भूमिका को लेकर जनता को उलझाये रखना चाहती है|इन्हें बिहार में सुशासन, अनैतिकता, नेताओं के अमर्यादित आचरण भ्रष्टाचार, शिक्षा की कुव्यवस्था जैसे जनसमस्याओं पर ध्यान देने की आवश्यकता महसूस नहीं होती, वल्कि इन समस्याओं के समाधान की रौशनी दिखाने के स्थान पर केवल कुतर्क प्रस्तुतिकरण करना आवश्यक समझते हैं|बिहार की जनता नेताओं के आचरण से उब चुकी है इस चुनाव में सिर्फ असली मुद्दों पर चर्चा करना चाहती है|

हकीकत में डा०श्री कृष्ण सिंह, विनोदानंद झा, कर्पूरी ठाकुर, जगन्नाथ मिश्र से लेकर लालू यादव तथा नीतीश कुमार के बिहार प्रेम को जनता भलीभाँति निहार चुकी है खेद के साथ कहना पड़ता है कि सभी नेताओं ने बिहार के निवासियों के साथ छल किया है|विस्तार से इस पर चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है|मुझे कहने में परहेज नहीं है कि बिहार भारत का सबसे पिछड़ा राज्य है, जिसे बिहार के नेताओं ने जातिवाद की राजनीति में उलझा दिया है और भविष्य में उलझाए रखकर अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं|

वर्तमान समय में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेता हों अथवा महागठबंधन के|सब के सब बिहार में एक ऐसा राजनैतिक चरित्र निर्माण करने की मंशा रखते हैं कि यहाँ बैरोजगार, गरीबी, भ्रष्टाचार, अनैतिकता, अन्याय, अपराध पर चर्चा जनता जनार्दन न करें|यहाँ पर लोग सिर्फ और सिर्फ जातिवाद पर ही चर्चा करते रहें और ये सभी नेता अपनी डफली अपना राग बजाते हुए सत्ता सुख प्राप्त करते रहें|सत्ता प्राप्ति के साथ बिहार को जी भरकर लूटते रहें|चारा घोटाला, सृजन घोटाला, मेधा घोटाला करते हुए अपनी तिजोरी भरते रहें|

आप स्वीकार भले ही नहीं करें परन्तु यह हकीकत है कि बिहार में मुख्यमंत्री का सात निश्चय योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ चुका है|सभी सरकारी योजनाओं में घुसखोरी, लूटपाट मची हुई है|विना पैसों के फाइलें आफिस के बाबुओं के मेज से एक ईंच भी नहीं खिसकता है|हर कदम पर बिहार में अनैतिकता का माहौल है सुशासन बाबू सबकुछ जान करके भी अनजान हैं|मात्र अनजान बनने का नाटक कर रहे हैं|

दूसरे तरफ महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव सिर्फ आलोचना करते हैं|अपनी कमियों का बखान करने वाले राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं को अपनी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं|जातिवाद के बन्धन से खुद को मुक्त करने के स्थान पर अनावश्यक रुप से दूसरे नेताओं की चर्चा करके अपनी छवि के निर्माण से पहले ही अपना सबकुछ बिगाड़ रहे हैं लालू के जंगल राज को बिहार की जनता भूली नहीं है, लालू जी के नक्शेकदम पर चल कर अपना ही अहित कर रहे हैं|

अन्त में मिलाजुलाकर हम कह सकते हैं कि बिहार विधानसभा निर्वाचन 2020 में चुनावी प्रतिद्वंद्विता दो दलों के बीच न होकर दो गठबंधनों यथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और महागठबंधन के बीच होने जा रही है|इस चुनाव में कतई बिहार का विकास मुद्दा नहीं बनेगा|मुख्यमंत्री की कुर्सी ही मुख्य मुद्दा होगा|सुशासन बाबू नीतीश कुमार जी तथा विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ऐन केन प्रकारेण बिहार के निवासियों को मट्ठा मख्खन मलाई लगाकर जनमानस को अपनी ओर आकृष्ट करेंगे|चुनाव में लौलीपौप दिखा कर अपने तरफ मोड़ना चाहेंगे और सत्ता की कुर्सी पर काबिज होकर अपना उल्लू सीधा पांच साल तक करते रहेंगे|कुर्सी पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेता नीतीश कुमार अथवा महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव होंगे|हर स्थिति में बिहार की जनता की हार होगी तथा पांच साल तक दु:खों का रोना रोने वाली यही जनता पांच साल बाद अगले लौलीपौप पाने की आकंक्षा में छटपटाती रहेगी|

बहुत बहुत आभार!

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