बिहार विधानसभा बुलेटिन– दिग्विजय सिंह

बिहार में विधानसभा निर्वाचन 2020 की अभीतक घोषणा निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नहीं की गई है|परन्तु दो प्रमुख गठबंधन महागठबंधन तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दलों के बीच सिर फुटौब्बल का खेल जारी है| राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के दो दल जदयू और भाजपा सीटों के तालमेल पर लगभग आपसी सहमति बना चुके हैं|इस गठबंधन के लिए लोजपा सरदर्द बनता जा रहा है| लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान एक तरफ बिहार में भाजपा का आलोचना करने से बच रहे हैं तो दूसरे तरफ जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी और उनकी सरकार की आलोचना करने से बाज नहीं आ रहे हैं| ऐसा करके एक तरफ चिराग पासवान खुद को नीतीश कुमार जी के समकक्ष अपने को सिद्ध करना चाहते हैं तो दूसरे तरफ दबाव बनाकर विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए अधिक से अधिक सीट हासिल करना चाहते हैं|
महागठबंधन के घटक दलों में भी लगभग यही स्थिति है|हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जीतन राम मांझी, रालोसपा के उपेन्द्र कुशवाहा और कांग्रेस के कुछेक नेता अपने आप को तेजस्वी यादव से कद में छोटा नहीं समझते हैं|तेजस्वी यादव के नेतृत्व को स्वीकार करने की स्थिति में नहीं हैं|उनकी महात्वाकांक्षा तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के रुप में आरे आ रही है और तेजस्वी यादव हैं, जो अपनी राजनैतिक क्रियाकलापों से इन नेताओं की महात्वाकांक्षाओ़ं पर प्रहार करते हैं| स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है| लगता है कि महागठबंधन के घटक दलों में तालमेल नहीं होने वाला है|राजद अपने स्थापना काल से कभी भी इस प्रकार के संकटग्रस्त स्थिति में कभी नहीं रहा है|तेजस्वी अभी खुद को लालू यादव की स्थिति में साबित नहीं कर सकते हैं|उनके व्यवहार से खिन्न होकर राजद के कई वरीय नेता पार्टी की प्राथमिक षदस्यता से तथा दलों के पदों से इस्तीफा देकर पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं|
सुशासन बाबू को जानने वाले जानते हैं कि वो कदाचित अपने समकक्ष किसी नेता को अपने गठबंधन में स्वीकार नहीं कर सकते हैं|यही कारण है कि चिराग पासवान की आलोचना से खिन्न होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से लोजपा को बाहर करने तथा जन अधिकार पार्टी के पप्पू यादव को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का घटक बनाने की मंशा बना चुके हैं| पप्पू यादव का कोशी क्षेत्र में अफना एक बड़ा जनाधार है और उन्हें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का घटक दल बनने में कोई आपत्ति नहीं हैं|
,,,, तेजी से राजनैतिक समीकरण बदल रहा है|ऊंट किस करवट बैठेगा, बता पाना मुश्किल है| इधर कोरोना संक्रमण तेजी से अपना पैर पसारता जा रहा है|लोगों की इच्छा है कि कोरोना संक्रमण संकट के दौर में चुनाव कराया जाना सुरक्षित नहीं है|सरकार को चाहिए कि पब्लिक की सुरक्षा तथा संरक्षा के मद्देनजर कम से कम एक साल के लिए बिहार में चुनाव स्थगित कर देना चाहिए|बहुत बहुत आभार व्यक्त!

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