भाषा मे ब्रम्ह और जीव के बीच माया रुकावट डालती है

मुंगेर जिला के संग्रामपुर से रोहित कुमार का रिपोट

वेदांत की भाषा मे ब्रम्ह और जीव के बीच माया रुकावट डालती है लेकिन आधुनिक भारत मे ऋषि संतान भारतीयों और भारतीय संस्कृति के बीच विदेशी संस्कृति और सभ्यता माया के रूप में रुकावट डाल रही हैं। उक्त बातें प्रखंड के शीतल नाम कहुआ के प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्री मद भागवत ज्ञान कथा के पांचवे दिन उड़ीसा से आये कथावाचक श्री भरतदास जी महाराज उत्कल व्यास ने कही। कथा के पाँचवें दिन श्री व्यास जी द्वारा असली को नकली और नकली को असली मानने का क्या परिणाम होता हैं। इसपर विस्तृत प्रकाश डालते हुए। उन्होंने बताया कि आज के मानव की वर्तमान स्थिति पे चर्चा करते हुए कहा कि आज हम भले चाँद पर चलें गए हो लेकिन मेरी मानवता धरती पे कराह रही हैं।

पशु पक्षियों की प्रकृति में विकृति नहीं आयी है। परंतु विकृति तो मानव की प्रकृति में आई है। जिसके कारण आध्यात्मिक दुर्गति हो रही हैं। मानव आज आध्यतम से दूर हो रहा है। ये उसकी भूल हैं। वही सात दिवसीय श्री मद भागवत ज्ञान कथा में भक्तिमय संगीत एवं भजन के साथ ही कथा श्रवण करने बाले महिला पुरूष श्रद्धालुओं की काफी भीड़ देखी गई। साथ ही इस सात दिवसीय भागवत कथा के व्यवस्थापक श्री रामखेलावन शर्मा एवं दर्जनों कहुआ के ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका देखी गई।

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