मकरस्क्रान्ति के दिन सैकड़ो युवा बच्चे खेलते है गिल्ली डंडा, करते है अपने संस्कृति और परम्परा का निर्वहन

छपरा सैकड़ो वर्षो से चली आ रही परंपरागत गिल्ली डंडा को आज भी जीवित रखे हुए है यहां के युवा खिचड़ी यानी मकरस्क्रान्ति के दिन सैकड़ो की संख्या में लोग शामिल होते है इस खेल में।गिल्ली डंडा का खेल जिसे अभी के लोकप्रिय खेल क्रिकेट का जन्मदाता भी माना जाता है वही इस खेल में काफी शारीरिक मेहनत भी होता है इस खेल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि खिलाड़ी गिल्ली को अपने शरीर के विभिन्य अंगों पर से रखकर मारता है

जिसे कई नामो से भी जाना जाता है।खिलाड़ियो की माने तो वो अपने बचपन मे अपने पिता और दादा के साथ यहां आकर खेल को देखते थे आज वही बच्चे अपने बच्चो के साथ इस खेल का आनंद उठाते हैबाईट टू बाईट खिलाड़ी

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