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मोबाइल की वजह से महिला आयोग और महिला पुलिस थानों में आते हैं काफी मामले

पटना से रत्नेश कुमार

बिहार में यह तथ्य महिला आयोग और महिला पुलिस थाने में आ रही शिकायतों के आधार पर साबित हो रहा है।आयोग के मुताबिक महीने में 30 से 40 केस मोबाइल पर अधिक बात करने के कारण आ रहे हैं।मोबाइल फोन ने भले ही दूरियों को खत्म किया है, लेकिन यही अब वैवाहिक संबंधों को भी बिगाड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है. यह तथ्य महिला आयोग और महिला पुलिस थाने में आ रही शिकायतों के आधार पर साबित हो रहा है।

जी हां, बिहार महिला आयोग और महिला थाने में रोजाना ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं, जहां रिश्ते टूटने की वजह कहीं न कहीं मोबाइल फोन पर ज्यादा बात करना होता है। जबकि महिला आयोग और महिला पुलिस थाने के रिकॉर्ड के अनुसार, दहेज प्रताड़ना संबंधी शिकायतों में अधिकांश मामले ऐसे हैं, जिनमें वैवाहिक संबंध छह महीने भी नहीं टिक पाते हैं और काउंसलिंग पीरियड में ये बात सामने आई कि ससुराल पक्ष बहू द्वारा मोबाइल फोन पर अपने मायके में लगातार बात करना पसंद नहीं करता है। वहीं लड़की पक्ष का तर्क था कि उनकी बेटी पर कई तरह की बंदिशें लगाई गई हैं।यकीनन इस तरह से मोबाइल, रिश्तों के बीच में लकीरे खींच रहा है। मोबाइल पर अधिक बात करने के 30 से 40 मामले हर महीने महिला आयोग और महिला थाने में आ रहे हैं। हालांकि दोनों जगह वैवाहिक संबंधों को बचाने की भरपूर कोशिश की जाती है।महिला आयोग की अध्‍यक्ष ने कही ये बात महिला आयोग की अध्यक्ष दिलमणि मिश्रा ने कहा, “हमारे यहां हर रोज 2 से 3 मामले ऐसे आते हैं, जिसमें कहीं न कहीं रिश्तों में अलगाव की वजह मोबाइल फोन होता है। अधिकांश मामलों में ससुराल पक्ष के लोगों ने कहा कि उनको बहू के 12 घंटे मायके बात करना पसंद नहीं होता है।जबकि कई पुरुषों ने शिकायत की कि उनकी बीवी अपने घर पर माता-पिता से ज्यादा बात करती हैं।ससुराल में कुछ भी होता है मिनटों में खबर माइके वालों को हो जाती हैं।

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