विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 2020.

दिग्विजय सिंह

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस 202

आज विश्व का एक हकीकत है, जिससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि- जल, जंगल और स्थल के विना पकृति अधूरी होती है|


प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को संसार के सभी देशों में विश्व प्रकृति संरश्रण दिवस का आयोजन किया जाता है|इस अवसर पर पर्यावरण विशेसज्ञ वर्तमान परिवेश में विश्व की कई जीव, जन्तुओं की प्रजातियां और वनस्पतियों के विलूप्त होने की विशद चर्चा करते हैं|इस बात की भी चर्चा की जाती है कि इन जन्तुओं तथा वनस्पतियों के विलूप्त होने से पर्यावरण असंतुलन की स्थापना तो नहीं हो रही है|ध्यातव्य हो कि पर्यावरणीय असन्तुलन के कारण विश्व अपना एक कदम विनाश की ओर बढाती है|
28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर हम विलूप्त होते सांसारिक जीव जन्तु तथा वनस्पतियों की रक्षा का संकल्प लेते हैं और इसे ही पर्यावरण विशेषज्ञ अपने जीवन का उद्देश्य बनाते हैं|स्थल, जल और जंगल के विना प्रकृति अधूरी है और इसके विना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है|
आज से लगभग 70 वर्ष पूर्व हमारा देश भारत वन्यजीव, जन्तुओं तथा वनस्पतियों के लिए विश्व प्रसिद्ध था|यहाँ वन्य जीव जन्तुओं तथा विभिन्न वनस्पतियों की दुर्लभ प्रजातियां थी, जिसके सन्दर्भ में सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त करना कौतुहल की दृष्टि से आवश्यक तथा मनोरंजक माना जाता था| भूमण्डल पर श्रृष्टि की रचना, श्रृष्टि का विकास और विश्व श्रृष्टि में मानव का स्थान शोध का विषय है| जीवन की उत्पत्ति, विकास और संरचना अध्यात्मिक विषय माना जाता है|प्राचीन कालीन अनेक भीमकाय, विशालकाय जीवों का लोप क्यों और कैसे हुआ? विचारणीय विषय है|उसी को ध्यान में रखकर यह विचार करने की आवश्यकता है कि क्या भविष्य में वर्तमान जीव जन्तुओं के विलूप्त होने की कोई आशंका है❓ इसके विलूप्त होने के लिए जिम्मेदार मानव का अपना स्वार्थ तो नहीं है❓ सोंचा जा सकता है और इस पर विज्ञान विशारदों तथा पर्यावरण विशेषज्ञों को विशेष रूप से विचार करने की जरुरत है|अन्यथा विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस का आयोजन सिर्फ खानापूर्ति बन कर ही रह जाएगा और यह आयोजन बेमानी ही रह जाएगा|

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