सुलतानगंज के दरबारी सिंह मध्य विघालय मे अजगैविनाथ साहित्य मंच के द्वारा कवि गोष्ठी व मासिक बैठक का आयोजन।।

भागलपुर ःसुलतानगंज के दरबारी सिंह मध्य विद्यालय के प्रांगण में अजगैवीनाथ साहित्यमंच सुलतानगंज के तत्वावधान में मंच के अध्यक्ष साहित्कार भावानन्द सिंह प्रशांत की अध्यक्षता में मासिक बैठक ,कवि -सम्मान व कवि गोष्ठी आयोजित की गई ।जिसमेँ भागलपुर ,खड़गपुर ,बरियारपुर एवं मुंगेर से आए कवियों ने अपनी कविता का पाठ किया ।सर्वप्रथम मंच के अध्यक्ष भावानन्द सिंह प्रशांत ने भागलपुर से आए वरीष्ठ कवि व कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महेंद्र निशाकर का माल्यार्पण कर सम्मान किया ततपश्चात मंच के संस्थापक सदस्य डॉक्टर श्यामसुंदर आर्य ने खड़गपुर से पधारे ख्यातिलब्ध कवि व शतदल साहित्यिक पत्रिका के संपादक एवं बिहार सरकार के पर्यावरण गीत के रचयिता प्रदीप पाल को अंग वस्त्र चादर ,अजगैवीनाथ का प्रतीक चिन्ह, तथा स्मृति शेष वरीष्ठ गजलकार छंदराज स्मृति सम्मान प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया ।

उसके बाद कवि गोष्ठी की शुरुआत मंच के उपध्यक्ष शशि आनंद अलबेला के संचालन में हुआ ।सच्चिदानंद किरण ने दीप जले दीप जले ,जलता रहे कविता पढ़ा । बरियारपुर से आए कवि शिशिर कुमार सिंह ने राष्ट्रवाद पर रचना पढ़ी -हम अलग नहीं इंसान हैं ,एक ही मां की संतान हैं ।गजलकार दिलीप कु. सिंह दीपक ने कहा -जेल से कातिलों ने कत्ल अंजाम दिया ,शहर में चर्चा है..वहीं बरियारपुर के बुद्धि जीवी मंच के अध्यक्ष कथाकार संजीव प्रियदर्शी ने माँ पर ममस्पर्शी रचना सुनकर माँ की प्रासंगिकता को रेखांकित किया -माँ दया है जीवन है समर्पण है ,बच्चों के जीवन का दर्पण है। खड़गपुर से आए जागृति साहित्यमंच के अध्यक्ष ज्योतिष चंद्र ने भारत के शहीद पर रचना पढ़कर आंखों में आंसू भर दिए-गौरव गाथा तुम जोड़ गए ,किसके भरोसे छोड़ गए।खड़िया से आए कवि राज किशोर मुसाफिर ने कहा- चल दिया बेदर्दी सबको बिसार के ,महकेगा कैसे चमन बिन तेरे प्यार के ।संचालन कर रहे शशि आनंद अलबेला ने समकालीन कविता -आपके अंदर छिपी जो वेदना है ,दरअसल वो सत्य की संवेदना है ,पढ़कर मन मोह लिया । सम्मानित हो रहे कवि वरीष्ठ रचनाकार प्रदीप पाल ने वर्तमान विषयों को छूती दो रचना इंकलाब और स्त्री पढ़कर समाज को इसपर मंथन करने पर मजबूर कर दिया- इंकलाब है तो बचे रहेंगे सपने..बची रहेंगी सभ्यता ।और स्त्रियाँ हैं तो पृथ्वी होने का गुमान है..पढ़ी ।भावानन्द सिंह प्रशांत ने प्रेम को समर्पित गीत – आज मौसम म़े खुदा का नूर झलकता है ,राज की बात कहूँ मेरा मन बहकता है, तरन्नुम में गाकर विभोर कर दिया ।डा. श्यामसुंदर आर्य ने भजन – दैय्या रे मोरी चुनरी सिलवा दे गाकर कृष्ण के महिमा को उकेरा ।कवियत्री उषाकिरण साहा ने आज के हालत पर रचना -वो हमारा बागवां हम जिनकी संतान हैं ,न कोई हिन्दू न कोई मुसलमान हैं ,पढ़ कर सुर्खियां बटोरी ।बाल कवियत्री दिव्यांशिका गुप्ता ने कविता -मैं चीनी हूँ ,खाने में मिठास लाती पढ़कर मन मोह लिया।युवा कवि एम . सलमान बी. ने आज पाशविक हालात पर कविता -भारत माँ के आंगन में अब गिद्धों का ही डेरा है पढकर ,देश की बेटियों पर हो रहे अत्याचार पर ध्यान खींचा।मोतीलाल शर्मा ने कहा -भारत माँ के लाल हैं हम ,क्यों फिर भी बदहाल हैं हमः नौवागढ़ी से आए ओजश्वी कवि नागेश्वर नागमणि ने कहा -हिटलर शाही नही चलेगी जनता जाग चुकी हैं । राम स्वरूप मस्ताना ने जवां नजर है मेरी जवानी भरी हैं ये चाल मेरे ,ये धूप मे न पके है बाल मेरे पढ़कर खूब हंसाया।मनीष कु. गूंज ने बच्चों को संबोधित अंगिका कविता – चूप चूप रे नूनू चूप रे ,तोरा हटिया मे देबौ गुपचुप रे पढ़ कर बच्चों को काफी आकर्षित किया।दिनकर कुमार ने गजल कहा -दिल की नाजुकी को समझिये ,ठोकर लगने पर टूट जाता है पढ़ा । कवि व शिक्षक अमरेन्द्र कुमार ने मात्रृ शक्ति का आह्वान कर राम और भरत जैसे पुत्र की प्रासंगिकता को रेखांकित किया ।मुख्य अतिथि के रूप में भागलपुर के कवि महेंद्र निशाकर ने बेटी की शादी पर कहा -केना बिटिया बिहैवै ,दहेज मांगै छै पढ़कर ज्वलंत समस्या पर सबका ध्यान खींचा।अकबरनगर से आए कवि अजीत कच. शांत ने कहा- यह कैसा संग्राम है ,हंगामा है चारो ओर ।नरेन्द्र मंडल ने कहा – मधुर वचन है दिव्य औषधि ..। अध्यक्ष के द्वारा गोष्ठी की समाप्ति की घोषणा की गई ।

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