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सुशील मोदी ने ट्वीट कर तेजश्वी यादव पर साधा निशाना।

रत्नेश कुमार

{पटना}सीमांचल के छह जिले लगभग हर साल कोसी और उसकी सहायक नदियों की बाढ़ से पीड़ित होते हैं।लेकिन तेजस्वी प्रसाद यादव विधायक,उप मुख्यमंत्री और विरोधी दल के नेता के नाते कभी बाढ़पीड़ितों की मदद के लिए इन जिलों में नहीं गए। 2018 में जब सीमांचल के एक करोड़ लोग बाढ़,वर्षा और बीमारी से जूझ रहे थे,तब वे 46 एसी वाले सरकारी बंगले से ट्वीट कर राजनीति करते थे।

इस चुनावी साल में जब राजद को वोट के लाले पड़ने वाले हैं, वे नागरिकता कानून पर दुष्प्रचार करने सीमांचल जा रहे हैं। सीमांचल के लोग जब बाढ़ से घिरे।तब केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ की टीम भेजी और लोगों की मदद करने में न किसी का धर्म पूछा,न कोई कागज मांगा। राज्य सरकार के राहत और बचाव अभियान में भी कभी न भेदभाव किया गया,न नागरिकता का कोई सबूत मांगा गया। राजद और कांग्रेस ने सीमांचल की जनता को बाढ़ पीड़ित के रूप नहीं,केवल वोटबैंक के रूप में देखा। महागठबंधन में शामिल दलों के पास न जनता की सेवा का कोई रोडमैप है,न कोई विचारधारा। ये दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से द्वेष करते हैं,इसलिए इन दो लोकप्रिय नेताओं की हर बात का विरोध करना ही महागठबंधन की विचारधारा है। द्वेष की राजनीति कभी बड़ी लकीर नहीं खींच पाती।

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