स्वतंत्रता सेनानी व हिन्दू-मुस्लिम एकता के अलमबरदार मौलाना मजहरुल हक की जयंती पर आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा इस वर्ष आयोजित नहीं

छपरा. महान स्वतंत्रता सेनानी व हिन्दू-मुस्लिम एकता के अलमबरदार मौलाना मजहरुल हक की जयंती पर आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा इस वर्ष आयोजित नहीं किया जाएगा. उक्त जानकारी मजहरूल हक मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष व बिहार विधान परिषद के पूर्व उपसभापति सलीम परवेज ने दी. उन्होंने बताया कि उक्त निर्णय जिला प्रशासन द्वारा एकता भवन को ट्रस्ट के हस्तगत नहीं कराए जाने के कारण लिया गया है. उन्होंने बताया कि एकता भवन की स्थापना प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की ईच्छा और आदेश के बाद अधिवक्ता शिवाजी राव आयदे के प्रयासों से हुआ था. एकता भवन की भूमि विधिवत स्मारक ट्रस्ट के नाम से निबंधित है

और ट्रस्ट भी ऐक्ट के अनुसार पंजीकृत है. भवन पर ट्रस्ट का पूर्ण कानूनी स्वामित्व है. भवन की बुकिंग या व्यवस्था के सभी कार्य ट्रस्ट देखता रहा है. यहां तक कि जिला प्रशासन को आवश्यकता पड़ने पर वह ट्रस्ट से ही संपर्क करता और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर भवन उपलब्ध कराया जाता था. इधर जिला प्रशासन ने ट्रस्ट के बिना सहमति नव निर्माण कार्य कराया और तभी से उसे अपने अधिकार में रखा है. बुकिंग भी प्रशासन के द्वारा ही की जा रही है. भवन को हस्तगत करने के सम्बन्ध में ट्रस्ट व प्रशासन के मध्य लंबा पत्राचार चला और प्रशासन को सभी वांछित कागजात उपलब्ध कराया जा चुका है. परन्तु अंत में मामले को लंबित रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने बिहार सरकार के विकास विभाग से मार्गदर्शन की मांग की. उसने भी ट्रस्ट के स्वामित्व के आधार पर मार्गदर्शन का औचित्य नहीं होने का जवाब दिया जो प्रशासन को प्राप्त हो चुका है. श्री परवेज ने बताया कि परंपरा के अनुसार 22 दिसम्बर को जयंती के अवसर पर कौमी एकता को समर्पित ऑल इंडिया मुशायरा को विरोध स्वरुप स्थगित रखने का निर्णय ट्रस्ट की बैठक में लिया गया. बैठक में अधिवक्ता मंजूर अहमद, अब्दुल रहीम राईन, अरशद परवेज मुन्नी, मुरारी सिंह, हरि प्रसाद गोकुल, बबलू जी, खुर्शीद साहिल, अधिवक्ता शिशिर कुमार, शाहिद जमाल आदि उपस्थित थे.

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