प्रदेश सरकार के आदेशानुसार शिक्षा विभाग ने दिशानिर्देश जारी किया है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जयंती के अवसर पर राज्य के सारे विद्यालय खुले रहेंगे।साथ ही साथ सारे विद्यालयों में गांधी जयंती समारोह का आयोजन किया जाएगा और इस अवसर पर प्रभातफेरी,गांधी कथा वाचन सहित कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।सरकार का यह निर्णय सराहनीय है और उम्मीद है कि ऐसे आयोजनों से हमारी नई पीढ़ी को राष्ट्रपिता के बारे में अधिक से अधिक जानने का और उन्हें समझने का मौका मिलेगा।मोहनदास करमचंद गांधी से महात्मा गांधी,बापू और फिर राष्ट्रपिता बनने का उनका सफर काफी अनुकरणीय है।

कुछ इतिहासकारों की पुस्तकें पढ़ने के बाद आज की युवा पीढ़ी के मन में राष्ट्रपिता के लिए सवालिया निशान भी उठते हैं।मैं ये नहीं कहता कि बापू पर सवाल उठाने वाले इतिहासकार गलत है,परंतु यह भी हो सकता है कि शायद वह गांधी को समझ नहीं पा रहे हों।राष्ट्रपिता के विचार,उनके सिद्धांत,उनकी सोंच, उनकी जीवनशैली,सब अनुकरण करने योग्य है।उनकी सबसे अच्छी बात तो यह कि उनके विचार,सिद्धांतों में नहीं बल्कि उनके व्यवहार में नजर आते थे।यह बेहद खुशी की बात है कि हमारी सरकार उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है।अभी हाल ही में यानी 23 सितंबर को एक और राष्ट्रीय धरोहर की जयंती थी।वो हैं हमारे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर।रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कवि के रूप में जाने जाते हैं।राष्ट्रकवि दिनकर ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का सृजन किया।उनकी प्रमुख रचना ‘परशुराम की प्रतीक्षा’, ‘हुंकार’ और ‘उर्वशी’ को साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया।उन्हें पद्मभूषण और ज्ञानपीठ सम्मान भी दिया गया।राष्ट्रकवि दिनकर ने सदा अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की भावना को लोगों में फैलाया।राष्ट्रकवि दिनकर ने अपनी रचनाओं से हिंदी साहित्य में एक अलग मुकाम बनाया।सबसे बड़ी बात कि उन्हें “राष्ट्रकवि” का सम्मान दिया गया,जो हर सम्मान से बढ़कर है।मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि राष्ट्रकवि दिनकर के समान न कोई हुआ है,न है और न कोई हो सकेगा।राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कई कार्यों पर कई साहित्यकारों में विवाद भी होता है,परंतु रामधारी सिंह दिनकर निर्विवाद रूप से राष्ट्रकवि हैं।हमारी नई पीढ़ी को जितनी आवश्यकता राष्ट्रपिता के सिद्धांतों को जाने की है, उतनी ही आवश्यकता दिनकर के रचनाओं को जानने की भी है।परंतु अफसोस कि हमारी सरकार राष्ट्रकवि को राष्ट्रपिता से कमतर समझती है।तभी तो 23 सितंबर को दिनकर जयंती के अवसर पर प्रदेश के सारे सरकारी विद्यालयों में छुट्टी थी।वहाँ कोई आयोजन नहीं हुआ। शर्मनाक तो यह कि दिनकर जयंती के अवसर पर मोकामा प्रखंड अंतर्गत मोकामा घाट उच्च विद्यालय,दिनकर जहाँ के छात्र रहे हैं।वह विद्यालय भी बंद था और वहां कोई आयोजन नहीं किया गया।आज मोकामाघाट उच्च विद्यालय यह बताने में गर्व महसूस करता है कि राष्ट्रकवि दिनकर इस विद्यालय के छात्र रहे हैं।राष्ट्रकवि के जयंती के अवसर पर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में छुट्टी का होना और किसी भी तरह के आयोजन का न होना,हम सबों को शर्मिंदा करता है। सरकार से गुजारिश है कि वह राष्ट्रकवि के महत्व को समझें।जितना महत्व राष्ट्रपिता के सिद्धांतों को दिया जाता है,उतना ही महत्व राष्ट्रकवि को भी देने की आवश्यकता है।

By Live24x7

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